Thursday, 15 October 2015
Saturday, 10 October 2015
साधना
चाहता हूँ मन साधना ,
पर मन में भरी है वासना ,
कई आधी -अधूरी कामना ,
कामना की आग में ,
जल रही है आत्मा।
है यही तो वेदना,
विलासिता की चाह में,
मर रही संवेदना।
आवाज देती चेतना ,
नयी राह देती चेतना
मैंने सुनकर भी अनसुना किया ,
फिर वही वासना , फिर वही कामना।
इस चक्र का कोई अन्त है,
या मृत्यु ने है क्रम थामना,
मंथन किया मन का बहुत,
एक ही उत्तर मिला,
मन साध ले कर साधना ,
बस साधना और साधना ....
पर मन में भरी है वासना ,
कई आधी -अधूरी कामना ,
कामना की आग में ,
जल रही है आत्मा।
है यही तो वेदना,
विलासिता की चाह में,
मर रही संवेदना।
आवाज देती चेतना ,
नयी राह देती चेतना
मैंने सुनकर भी अनसुना किया ,
फिर वही वासना , फिर वही कामना।
इस चक्र का कोई अन्त है,
या मृत्यु ने है क्रम थामना,
मंथन किया मन का बहुत,
एक ही उत्तर मिला,
मन साध ले कर साधना ,
बस साधना और साधना ....
Thursday, 8 October 2015
परिवर्तन
आत्मा चुप रहती है कई चोट खाकर भी,
व्यथित हो जाती है कभी - कभी ,
ग्लानि के एहसास से ,
अहंकार के भाव से ,
बेबसी या तिरस्कार से ,
पर सम्हल जाती है अगले ही पल
ये सोचकर ,
कि कुछ भी तो अटल नहीं,
जो आज है वो कल नहीं।
बस यही तो सार है जीवन का ,
अगर खुशी अनन्त नहीं,
तो दुःख भी अटल नहीं ,
परिवर्तन से बड़ा कोई बल नहीं,
हालात जो आज हैं,
वो कल नहीं। ……
Wednesday, 7 October 2015
Monday, 5 October 2015
Subscribe to:
Posts (Atom)